चाय
मैंने चाय चढ़ा दी है चूल्हे पे,
तुम अखबार पुराना ले आओ।
उन पुराने अखबारों के समाचार पुराने ले आओ।
कुछ क़िस्से सुनाओ मुझे,
कुछ के श्रोता बन जाओ।
मैं ले आया हूँ ख्वाब अधूरे,
उसे मुक्कम्मल करती बचपन की तुम एक रात बन जाओ।।
चाय...चाय...चाय,
क्या है आखिर इस चाय में,
जो बन बैठी है आदत कइयों की।
क्या ये एक रोग है जिसके है कई मरीज यहाँ,
या फिर कोई दवा जिस्से होते है कई काम यहाँ।।
सरकारी दफ्तरों में इसकी पुछ बहुत है,
सस्ती है, पर फिर भी बाबू मांगता है खर्चा इसका।
सोम मंगल हो या हो गुरु, शुक्र,
आज कल मयखानो से महंगा है खर्चा इसका।
एक कप दूध, एक इंच अदरक, दो कप पानी,
एक चम्मच पत्ती, एक चम्मच शक्कर, और बस शुरू कहानी।
मां कहती है दो चार बार उबाल तब जाके रंग आएगा,
और पापा अक्सर पूछते हैं तू क्या इसका ढंग भी सीख पाएगा।
कई यादो की है संदूक ये,
बिना बारूद के जो मार दे बंदूक ये।।
पापा बताते हैं कि मां को पहली बार एक प्याले के उस पार देखा था.,
उस सफ़ेद प्याले पे माँ के होठों की लाली से पापा को इश्क़ आज भी है,
पापा बोलते तो नहीं पर शायद इसलिए हमारे घर के प्यालो का रंग सफेद आज भी है।
तो अगर अगली बार जब आप हमारे घर आये,
और किसी कोने के किसी मेज़ पे आपको एक लिपस्टिक लगा कप मिले ,
तो समझ जायेगा अभी-अभी माँ ने चाय पी है,
और पापा फिर से उनसे मोहब्बत कर बैठे हैं।।
THIS IS TOO GOOD!! CHAI IS AN EMOTION 🫂
ReplyDeleteLoved it. Keep writing ☺️
ReplyDeleteBeautiful ❤️
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteKya baat h.
ReplyDeleteMast hai bhai, keep it up...
ReplyDeleteWah!!
ReplyDelete❤️❤️
ReplyDeleteNice .. 🔥
ReplyDeleteBht bht shandaar❤️
ReplyDeleteWahhh♥️♥️
ReplyDeleteWah……👏🏻👏🏻👏🏻
ReplyDeleteKeep writing. Keep sharing. Chai piyo n likhte raho Prabhat. Love teasing your poems!
ReplyDeleteAmazing one bhai 👏🏻👏🏻
ReplyDeleteShaandaar
ReplyDeleteAwesome
ReplyDeleteWaahhh. 💞👏👏👏
ReplyDeleteToo good!
ReplyDeleteIt touched my heart ❤️
ReplyDeleteIt touched my heart ❤️
ReplyDeleteMasterpiece 👌
ReplyDeleteChai and this peom, complimeneting each other !
ReplyDeleteEk dost ki yaad aagyi... ise padh k ... jo milne bulata tha hostel se bahr to Chai pilane k liye
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