क्यों नहीं मिलता।।
कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता.,
कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता।।
ए मुक्कमल जहां की ख्वाहिश रखने वालों,
बताओ मेरे बाग़िचे में एक वफ़ा का ही फूल क्यों नहीं खिलता।।
बहुत फूलों से खेले बड़े मयखानों में हम.,
पर सहर उसकी आंखों का नशाँ किसी महफिलों में क्यों नहीं मिलता।।
अबके है होली बड़ी दूर ए क़ासिद.,
बता की उसको छूने का कोई ओर दिन क्यों नहीं मिलता।।
वो तड़के भीगे बालों को संवारती थी हर दशहरे.,
बता ए काज़ी हमें कोई इससे बड़ा त्यौहार क्यों नहीं मिलता।।
वो छू ले तो बिन शक्कर की खीर भी मीठी है.,
पर आज कल ये खानसामों के खानों में स्वाद क्यों नहीं मिलता।।
उसे ग़ुलाब की कलियां पसंद थी हमने ग़ुलाब के बागीचे सजाए,
अब ये शिकायत है ज़माने की ग़ुलाब कांटों के बिना क्यों नहीं खिलता।।
पहले रो लेते थे ज़ी भर कर अम्मा की गोद में हम.,
अब अम्मा की मुश्किलों में भी आंखों से आंसू क्यों नहीं निकलता।।
बड़ा ही निकम्मा बना दिया इस इश्क़ ने हमें सहर,
वरना क्या ये खुद बीन लोगो से बीच मैं आपको मुस्कुराता हुआ मिलता?
एक ख्वाहिश, एक इश्क़, एक नज़्म और एक ज़िहालत.,
बड़े अरसे से ढूंढे हमने ग़मो के निशान पर फिर भी माज़ियो का हिसाब क्यों नहीं मिलता।।
गर मिल जाता प्यार तो ग़म बस एक ही था.,
लगाए कितने इलज़ाम हमपे उसने, पर वहशत का निशान आज भी क्यों नहीं मिलता।।
Kya bat kya bat kyaa batt....
ReplyDeleteKya baat
ReplyDeleteThis is a masterpiece ❤️ awesome prabhat.
ReplyDeleteNice 🙂
ReplyDeleteAwesome 🙌🏻
ReplyDeleteNice bro
ReplyDeleteThat's deep 🤔. Bless you, keep it up 😇
ReplyDeleteAwesome
ReplyDelete🖤🖤🔥🔥
ReplyDeleteAmazing
ReplyDeleteThis is too good♥️
ReplyDeleteGreat words😁
ReplyDeleteWow❣️
ReplyDeleteAwesome ❤️
ReplyDeleteVery nice 👍🙂
ReplyDeleteBeautiful 😍
ReplyDeleteGood one ❣️
ReplyDeleteBeautiful ❤️
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteNice😍😍
ReplyDeleteBahut khoob ❤️
ReplyDeleteAwesome ❤️❤️
ReplyDeleteKhoobsurat ❤️
ReplyDeleteBeautiful:)
ReplyDelete🙂✨️
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