प्यार - क्या है?
राम सीता एक ऐसा मिलन जो सर्फ निर्मल और पावन ही नही,
बल्कि ज़माने के सच झूठ, कायदे कानून और तौर तरीकों से परे है।
सच ही कहा है किसी ने की कुछ कहानियां मृत्यु के साथ खत्म नहीं होती, आदि काल से चली आ रही ये राम सीता की कहानी शायद सच में कई जन्मों के बाद भी यूं ही चल रही है।
त्रेता में प्रभु राम ने कहा था, मुझे बस तुम प्रिय हो सीते,
कई युग बीत गए पर आज भी राम हमेशा सीता को ही ढूंढते है।।
लोग कहते है इस संसार में सिर्फ़ कहानियां शाश्वत है, पर प्यार का क्या?
त्रेता में राम ने सीता से किया था और द्वापर में राधा ने कृष्ण से,
कभी सती ने भगवान शंकर को चाहा था, तो भोले बाबा ने भी कई शताब्दियों तक पार्वती का इंतजार किया था।
क्या है आखिर प्यार जो देवताओं को भी इंतजार करवा देता है।l?
क्या नही करवाया इस प्यार ने.,
कृष्ण ने राधा के समक्ष सर झुकाया, तो कभी विष्णु बिना लक्ष्मी पूजे नही जाते।
"की है मोहब्बत, इल्जाम, खुशी, ग़म और धोखा.,
अब इसके कई रूप है किस किस नाम से मैं पुकारू इसे"
मुझे मालूम नहीं कैसे बयान करूं मैं ये ढाई आखर के मायने
"कृष्ण नतमस्तक है, राम व्याकुल है, शंकर शोक विलीन है.,
ये प्यार के मारे युगों युगों से सब मजबूर है"।
इक रोज़ मिले जो मुझे तो पूछूंगा मैं उससे, की क्या है रहस्य तेरा?
क्यों तेरे ना होने पे सब वीरान सा लगता है.,
क्यों तेरे होने से ही मेरे दिल के पतझड़ में बसंत गूंज उठता है।
क्यों सौ समंदर पार भी तेरे होने का एहसाह हमे तेरी ओर कीच लेता है.,
और तेरे जाने पे ग़म बेइंतहा होता है।
क्यों पानी के प्रबल वेग से भी प्रबल तेरा इज़हार होता है.,
और क्यों तेरा इकरार इमारतों को भी अमर कर देता है.,
ख़ाली जेबों में भी तेरे होने पे लोग महल बना लेते है.,
और तेरी गैर मौजूदगी में घर भी एक मकान होता है
"देखो डाला है प्रभु राम ने सेतु समंदर पर,
कोई बतादे सीता को की अब सईयां संग मिलन नजदीक है"।।
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