सपने!!

 आखिर क्या होते है सपने??


एक रहस्य या एक दिल बेहला देने वाला जादू?

अधूरे किस्सों को कामिल करने का जरिया या अपनी नाकामयाबी को छुपाने का बहाना ??


DCT (Dreams Come True)


द कपिल शर्मा शो के एक एपिसोड पे सुनी थी मैंने ये लाइन।


क्या वकाई सपने पुरे होते है,


हां शायद वरना आज श्याद दुनिया मंगल पे ना पहुँचती,

पर श्याद नहीं भी, क्योंकि लाखो बचे तो आज भी बेघर घूम रहे है। 



अच्छा  ये सब छोड़िये अब मेरी ही बात ले लीजिये.,


पहली बार जब होश संभाला तब शेफ बनने की ख्वाहिश थी

पर फिर रिया के साथ कब शेफ का सपने डॉक्टर में बदल गया, पता ही नहीं चला 


रिया ! मेरी बचपन की सबसे अच्छी दोस्त और श्याद मेरे बचपन का दूसरा प्यार 

क्योंकि पहला तो आज भी हिंदी वाली नीतू मैडम है


रिया मेरे पड़ोसी के मोहल्ले पे नए नए डॉक्टर हुए राघवेंद्र जी की बेटी और मेरी स्कूल की साथी 

हम अक्सर दिन में स्कूल से आते वक़त साथ आते थे 

एक दिन यूं ही मैंने रिया  से पूछा 

“की तुम्हारा सपना क्या है?”

उसने कहा “मुझे अपने पापा जैसा बनना है। “

मैंने पूछा “क्यों?” 

कहती “पापा लोगों की जान बचाते है और उनकी मदद करते है इसलिए।”

फिर उसने पूछा “और तुम्हारा क्या सपना है” 

अब मैं ठहरा दिन में तीन बार घी खाने वाला पर किस पर किस मुँह से बोलू की शेफ और लड़की है इम्प्रेस भी करना है 

मैंने कहा “मुझे इंजीनियर बनना है”.,


अब देखिये जनाब सपनो के कोई नियम कायदे तो होते नहीं और ना ही कोई असल रूप 

मिराज है जैसा चाहेंगे वैसा चोला ओढ़ा लेगा 


२०११ में जब इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता था तो ना जाने कितने ही लोग क्रिकेटर  बनना चाहते थे और 

मैं, वो आवाज.,,

आज भी याद है मुझे वो आवाज, गूंजती है आज भी कानो में मेरे 

Dhoni finshes of in the style india lifts the world cup after 28 years, party starts in the dressing room….


सपने कई देखे मैंने,


सपने लाखो कमाने के 

सपने आस्मां पे छा जाने के 

सपने बस एक और रात बिना दवाई खाये जीने का तो 

सपने एक मुकम्मल जहां बनाने का। 


अब इतने बड़े बड़े सपने देख तो लिए है पर पूरा करे कौन ?


एक बड़ा अच्छा शेर है की 


सपने लाखो बिक रहे थे बाजार में, 

किसी ने सोने से कुछ खरीदा, तो किसी ने रुपयों से।  

हम तो खाली हाथ चले थे बज़ार में,

अपनी नींद बेच अपने सपने खरीद लाये है। 


सपने भले एक मिराज हो, कल्पना हो, हकीकत या एक रहस्य ही क्यों ना हो 

अगर पूरा करना है तो नींद की आहूति तो देनी होगी। 

फ़र्क इस बात से नहीं पड़ता की.....,


“गोलू! गोलू!” “उठ ना हाय राम ये लड़का फिर सो गया, उठ ना “

माँ की आवाज और आज फिर एक सपना अधूरा रह गया 


“क्या माँ अच्छा सपना देख रहा था, उठा क्यों दिया “ 

साहबज़ादे ११ बज रहे है उठो वरना आरहे है पिता श्री आपके सारे सपने पुरे करने।।


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