एक था राजा एक थी रानी दोनो मर गए खत्म कहानी
वक़्त लगता है एक कहानी को कहानी बनने में,
बचपन में हम सब ने एक कहानी सुनी थी की
एक थे राजा एक थी रानी
दोनों मर गए ख़त्म कहानी।।
ये कहानी मैंने पहली बार तीसरी क्लास में सुनी थी.,
हम सब के ज़िद करने पे हमारी हिंदी की टीचर से हमे सुनाई थी
जहाँ सारे बच्चे इस कहानी को सुन हस रहे थे.,
मैं दाई और की रौ में तीसरी बेंच पे बैठे ये सोच रहा था की ये कहानी तो अधूरी है.,
अरे कुछ तो होगा और इस कहानी में
तब मुझे पहली बार ये अहसास हुआ की वक़्त लगता है एक कहानी को कहानी बनने में।।
तकरीबन एक साल बाद मैंने अपनी पहली कहानी लिखी
वही राजा और रानी वाली कहानी.,
पर वो मरते नहीं हैं
राजा हर रोज़ सवेरे सवेरे दफ्तर जाता है,और रानी बड़े इत्मीनान और प्यार से
हर शाम घर के चौकट पे बैठ राजा के लौटने का इंतज़ार करती है।
ऐसी ही तो होती है ना कहानियाँ।
कुछ प्यार के पल कुछ तकरार के
पर १८ की उम्र में मुझे ये एहसास हुआ की
कुछ कहानियों का मुकम्मल होना ही है उनका अधूरा रह जाना
मेरे पहले इश्क़ ने मुझे ये सिखाया की हर कहानी की किस्मत में पूरा होना नहीं लिखा होता।।
पर कहानी रूकती नहीं है कभी.,
जरा धीमे चलती है कभी बुलेट ट्रैन से भी तेज दौड़ पड़ती है पर पर कभी ठहरती नहीं है
मैं ज़िन्दगी के अपने हसीं मोड़ पे बस यही मान बैठा था की ये मेरी कहानी है,
मैं राजा हु इसका।
तो इसका अंत भी मैं ही लिखूंगा और और बेहद खूबूसरत अंत होगा वो.,
इतना खूबसूरत मानो नारंगी आसमान खुद बाहे फैलाये मेरी कहानी का अंत लिखेगा
पर एक रोज़ भरे स्टेशन के एक खाली सीट पे बैठे मेरी कहानी थम गयी
तुम जा रही थी…,
अब हमारी कहानी अलग होगी राजा तो होऊंगा मैं अपनी कहानी का पर अब तुम रानी मेरी कहानी की नहीं होगी,
तो फिर कैसे फिरसे शुरू करू मैं ये कहानी?
एक अधूरी कहानी के पीछे भागू या खुद की एक आधी कहानी को मुक़म्मल करू?
डूब जाऊँ मैं काशी की सुन सान गलियों की गहराइयों में.,
या लखनऊ के इमामबाड़े में पीछे छुप जाऊ.,
बल्लीमारान की चौखट पे छोड़ दू मैं जान अपनी
या इमरोज़ की नायाब मोहब्बत में बस जाऊँ?
बताओ क्या करू की ये कहानी मुकम्मल हो जाये?
क्या करू की ये कहानी तुम तक पहुंच अपनी मंज़िल को पाले ?
फिर एक शाम गंगा किनारे बैठ
गुलाबी शाम को आरती की तपन में सेक सेक कर मैंने यूं ही अपनी कहानी अधूरी छोड़
गंगा को गले लगा लिया।
क्या हुआ कहानी का अंत पसंद नहीं आया ??
अच्छा तो चलिए बदल देते है मेरी कहानी है
और मुझे जरुरत नहीं है एक रानी की
क्यूंकि मेरी कहानी में राजा तो हु ही मैं
और हर एक राजा की रानी तो होती है.,
फिर क्यों जिहाद करू मैं अपने ही दिल से.,
क्यों ना बढ़ाऊ एक-एक हाथ दोस्ती का दिल और दिमाग की तरफ से
बस फिर क्या था एक रानी भी मिली और साथ साथ जीवन मुकम्मल और कहानी भी पूरी हुई।
हम क्यों अक्सर अपनी कहानिया छोड़ दूसरे की कहानी के सूत्रधार बनना चाहते है
बंद कर देते है लिखनी अपनी खुद की कहानी और
दूसरे की अधूरी को पूरा करते हैं।
नहीं ठहरो, लड़ो, समझो, समझाओ, गिरो, दौड़ो, पर पर
अपनी कहानी पूरी करो, क्यूंकि........
वक़्त लगता है एक कहानी को कहानी बनने में
और फिर कहानी तो वही ही है की
एक था राजा एक थी रानी दोनों मर गए ख़त्म कहानी।
Bhot khoob
ReplyDeletePyaara
ReplyDeleteBahut khoobsurat hai ye kahani
ReplyDeleteBahut hi khoobsurat abhivyakti or jeewan ko dekhne ka naayab nazaria
ReplyDeleteAag lgaaa di bhaiii 🔥🔥🔥🔥
ReplyDeleteNew direction to "ek tha raja, ek thi rani". Nice 🖤
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