हा मैं फिर मिलूंगा तुझसे।
बेशक अपनी अपनी ज़िन्दगी का हर एक पहलू जीना है हमें.,
पर खुशी इस बात की है, की कभी ज़िन्दगी के किसी दौर में हम साथ थे।
और उम्मीद इस बात की, की कभी किसी ज़िन्दगी के किसी दौर में हम फिर साथ होंगे।
हा मैं फिर मिलूंगा तुमसे, कब कैसे पता नहीं।
कभी ओश की बूंद बन के तेरे क़दमों को छू जाऊंगा.,
कभी तेरे सिंदूर की लाली बनके तेरे माथे पे रह जाऊंगा।
कभी एक काला काजल बन तेरी आंखों को सजाऊंगा.,
तो कभी रेशम का एक धागा बन तेरी साड़ी में बंध जाऊंगा।
कभी खुशियों का एक कतरा बन तेरी आंखो से बह जाऊंगा.,
तो कभी चटनी का एक दाग बन तेरे सूट पे रह जाऊंगा।
दूर कहीं किसी आसमान से हर रात तेरी खिड़की पे तारो सा रोशन हो जाऊंगा.,
तो कभी ज़िद्दी पर गुमनाम हवाओं सा तेरे गालो को छू के बह जाऊंगा।
कभी समन्दर का मोती बन के तेरे मालों में गूथा जाऊंगा.,
तो कभी तेरी चादर की सिलवट बन तेरे बिस्तर पे बिछ जाऊंगा।
तेरी चाय का कुल्हड़ बन तेरे होटों को छू जाऊंगा.,
तो कभी तेरा ख्याल बन तेरे शब्दों से तराशा जाऊंगा।
कभी एक हसीन ख़्वाब बन तेरी नींद में आजाऊंगा.,
तो कभी भटकती एक रूह बन के तेरी यादों में रह जाऊंगा।
कभी तेरी पायल का एक घूंघरू बन लय पे थिरकता जाऊंगा.,
तो कभी टूटी चूड़ी का कांच बन तेरे हाथो में चुभ जाऊंगा।
मैं पहली बारिश की फुहारों से माटी की उठती महक लेके तेरे जिस्म में समा जाऊंगा.,
और बस यूं ही देखते देखते कभी किसी ज़िन्दगी के किसी दौर में मैं तेरा बन जाऊंगा।।
Amazing 👏 ..keep writing
ReplyDeleteWowww, superb ❤️
ReplyDeleteUr words always touch my soul♥️
ReplyDeleteThank you so much ❤️
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