तू ही है

तू ही देव और तू ही दानव.,
राम तू ही और तू ही रावण।
तू ही पांडव और तू ही कौरव.,
शिव तू ही और तू ही भैरव।।
झाक सके तो झाक ले अंदर
बुरा छुपा है तेरे भीतर।

ज्ञानी क्या अज्ञान यही है.,
कलयुग का अभिशाप यही है।
तू ही ब्रम्हा तू ही विष्णु.,
कंस तू ही और कृष्ण तू ही है।।

चपला का श्रृंगार तू ही है.,
जौहर की चिंगार तू ही है.,
तू ही है कलयुग का राक्षस.,
तू ही है श्री राम का वंशज।
विष्णु का दासवतार तू ही है.,
गीता का हर सार तू ही है।
गुरु द्रोण का शिष्य तू ही है.,
दशरथ का भी पुत्र तू ही है।
तू ही है ब्रम्हा का ज्ञान.,
और तू ही है बल से बलवान।

ब्रम्हाण का राज तू ही है.,
कलम की कटाक्ष तू ही है।
तू ही इन्द्र का वज्र.,
विष्णु का चक्र तू ही है।
ममता भरा प्यार तू ही है.,
पिता की फटकार तू ही है।
तू ही शिव का डमरू.,
और अभिमानी का मान तू ही है

तू ही है कौरवों का घमंड,
वेदों सा तू है अखंड।
तूने ही तो रचा तांडव.,
तेरे पथ पे चले पांडव।।

तमस छिपा है सबके भीतर.,
असुर बैठा है सबके अंदर।
उठा तूणीर और लक्ष्य लगा.,
खुद का सोया भाग्य जगा

चल तिमिर हटा तो दीप जले
बना पथ जिसपे संसार चले।।

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