अधूरी कहानी

ख़त तुम्हारे आज भी पुरानी किताबों के पुराने पन्नों पे छपे हुए है.,
बागीचे में अपने तेरे पुराने फूल हमने दफन किए हुए है।
छज्जे पे कुछ सामान तुम्हारा, और दिल में कुछ धुंधली सी यादें बस अब यही है काफी, 
क्योंकि जिस मोड़ में छूट गया था साथ हमारा तुम्हारा, अब उसी मोड़ पे हम अपना घर बसाए हुए है।।

इल्म तो था हमें की अबकी सावान तुमने वादा किया था मिलोगे हमें.,
पर सुख गए है बरस के सावान के बादल, तेरे आने की खबर ना आयी हमें।
यूं वादा खिलाफी तो फितरत सी हो गई थी तुम्हारी.,
पर तुम ना आओगे दुबारा, तुमने जाते जाते मुड़ के ये बताना भी ना मुनासिब समझा हमें।।

ठंड की ठिठुरन में मैंने पश्मीना सा ओढ़े रखा है तुझे.,
एक अनजानी दराज के किसी अनजाने कोने में मैंने राज सा छुपा रखा है तुझे।
ख्वाहिश भी थी और चाहत भी की बस एक बार ही सही हमें तेरा होना है.,
खैर तुम हुए तो नहीं मेरे पर फिर भी चादर की हर एक सिलवटों में मैंने संभाले रखा है तुझे।।

इन लतीफों का क्या है बस फकत एक अधूरी कहानी ही तो है हमारी तुम्हारी.,
कभी अनसुनी, कभी अनदेखी तो कभी खुद ही नाकर दी यही तो थी ना अब कहानी हमारी तुम्हारी।
चलो लगाए हिसाब आज बदतमीजियों का अपनी हम.,
कहा था, वादा भी था पर फिर भी कहां बर्दाश्त थी हमें बदतमीजियां हमारी तुम्हारी।।

मैं लेहरे थी तेरी, तू मेरा साहिल हुआ.,
मैं सुनी रातें थी तेरी, तू मेरा सवेरा हुआ।
मैं रोशनी थी तेरी, पर अब तू मेरा अंधेर हुआ.,
गुमनामी में कुछ यूं गुम हुए की अक्सर तनहा मुस्कुराते रहे हम.,
कुछ यूं रुखसत हुआ तू हमसे की गले लगा तुझे रोक भी ना पाए हम।।

Comments

  1. This is Masterpiece . Sooo real ❤

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  2. Love it bro. 😍
    Keep it up 👍

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  3. Only if I had as rich vocabulary as you, I could have praised you aptly for yout talent!!!!! Amazing writing!

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