प्रेम
मैं अक्सर तुम्हारे आस पास निशब्द सा हो जाता हूं.,
तुम मेरी भावनाओं को अपने शब्दों में उतार दो ना।
नहीं कर पाता इकरार जिन जिन बातों का मैं .,
तुम बस यूं ही मेरे नज़दीक बैठ उनका मेरी आंखो से ही इल्म लगा लो ना।।
मैं भी अपनी मंज़िल से वेद कि तरह भटक सा गया हूं.,
सुनो तुम भी एक तारा सी मेरी राहों को मंज़िल से मिला दो ना।।
उस रोज़ तुमसे कुछ सवालों के जवाब ही तो लेने आया था मैं.,
पर तुम्हारी मुस्कुराहट ने तो मेरे सारे सवाल ही बदल डाले थे।
यूं तो कुछ बहुत मशहूर नहीं था मैं.,
पर तेरी मोहब्बत ने तो सारे शहर में मेरे चर्चे करा डाले थे।
वो चाय की प्याली पे अक्सर तेरी होटों की लाली को संजोए रखता हूं मैं.,
बेहद होकर भी तेरी हदो में लिपट रोने की ख्वाहिश रखता हूं मैं।
बेइंतहा तेज़ी से हर रोज़ भागता हूं पर अक्सर तेरी ही यादों के आगोश में ठहरता हूं मैं.,
इन दिलो के बाज़ार में भाव मेरा कोड़ियो का था.,
तुझसे इश्क़ क्या हुआ आज इन बाजारों में सबसे महंगा बिकता हूं मैं।
तू श्याम है मेरा मैं मीरा सा बेसुध चाहता हूं तुझे.,
तू बैराग हैं मेरा मैं शिव सा पहनता हूं तुझे.,
तू गीता का सार है मैं बड़ी ध्यान से सुनता हूं तुझे।
तू राम है मेरा मैं सीता सा पूजता हूं तुझे.,
ज्ञान हुआ विज्ञान हुआ अरे ग्रंथो का निर्माण हुआ.,
पर जो कहा उस बसुरिवाले ने सबसे उपर प्रेम हा बस वहीं प्रेम मैं करता हूं तुझे।।
Nice💗
ReplyDeleteDhai aakhar prem ka,padhe so pandit hoy..very true words by rahim ...applied over u
ReplyDeleteSuprb 😎
ReplyDeleteGreat piece!!!
ReplyDeleteThank you so much mam
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