फ़र्क पड़ता है।
जब मेरे ख्वाबों के टूटने पे तुम साथ नहीं दिलासा देते हो.,
मेरे मना करने पे भी मुझे बेइंतहां छेड़ते हो।
मेरे पास आने पें अक्सर दूर जाने के लिए तड़पते हो,
बेगानों की तरह कहीं भी मुझसे मुंह फेर लेते हो।
सारे शहर से लड़ जाऊ मैं पर उससे कैसे लडू जो मेरे लिए सब से लड़ता है.,
पर अब जब सब छोड़ के तुम ही लड़ते हो मुझसे तो हां,
मुझे फर्क पड़ता है।।
तुमने ही तो कहा था मुझसे पहले अपनी इज्जत रखना
तुमने ही तो सिखाया था सबसे पहले अपना स्वाभिमान देखना।
झुंझलाने लगे हो आज पर तुमने ही तो बोला था ना कि बेबाक मुझसे अपनी सारी बातें बोलना, बेहद होके बस मेरे साथ बहते रहना,
बेहद हुई बेबाक हुई, मैं तुमसे मिल इक बार फिर ना पाक हुई।
पर तुम्हे कहां अब इन बातों में कुछ भी अच्छा लगता है.,
अनजाने से लगते हो अब तुम और तुम्हारी इन अनजानी हरकतों से
मुझे फर्क पड़ता है।।
उस घर से लाते समय कुछ वादा था तुम्हारा,
तुम बस मेरा हाथ थामे चलोगे, और बेदाग रखूंगी मैं आंगन तुम्हारा।
ना जाने कब हमारी राहें एक और मंज़िल बदल गई तुम्हारी,
जिम्मेदारी थी ना मैं फिर ना जाने कब मैं बोझ हो गई तुम्हारी।
ना थामता हाथ कोई ओर मेरा तो क्या अकेले तो आखिर चलना ही पड़ता है.,
पर जब थाम के हाथ फिर छोड़ा था तुमने हा तब ही से तो अकेले चलने पे
मुझे फर्क पड़ता है।।
M short of words to appreciate this beautiful piece of art... . .!!!! The incredible work
ReplyDeleteThank you so much mam ♥️
DeleteNice
DeleteEk number beti
ReplyDeleteThank you beti ♥️
DeleteAmazing! ❤️😘
ReplyDeleteThank you so much ♥️
DeleteBhai bhai 😍✋🙏
ReplyDeleteShukriya bhai♥️
DeleteAwesome....very well written 😍
ReplyDeleteBeautiful 💖
ReplyDeleteThank you ♥️
DeleteAs usual beautiful😍💓
ReplyDeleteThank you so much ♥️♥️
DeleteSuperb!!!
ReplyDeleteThank you didi
DeleteToo good man.. Keep going..🤘
ReplyDeleteGud one bro
ReplyDeletethank you bhai
Delete👏👏👏
ReplyDeleteBeautiful❤
ReplyDeleteBhut Sundar😊
ReplyDeleteLovely. Touch the emotion
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