सज़ा
आंसू भी थे ख़्वाब भी थे इन निग़ाहों में एक रोज़ तेरे लिए कुछ अरमान भी थे.,
तेरे जवाब के इंतज़ार में ना जाने खुद से ही कितने सवाल भी थे।
तू आया मैं महक उठी तू मोड़ता खरोचता मुझे मैं फिर भी तेरे आने पे खिलती रही.,
तूने कहा मैंने सुना, तूने जी भर नोचा मैं फिर भी तेरे ही लिए सजती रही।
बनारस के घाट पसंद थे मुझे और मुझे तूने वहीं घाट जैसा बना दिया था.,
लहरें आकर घाट छुती थी तू आकर मुझे नोचता।
जिस मोड़ पे छोड़ा तूने वहीं मंज़िल बना बैठे थे.,
हम खुद में खुद से भी ज्यादा तुझको बसा बैठे थे।
जमीर क्या हमें कहां पता था.,
हमपे तो बस तेरे इश्क़ का ही नशा था।
उस रात तूने एक थप्पड़ क्या मारा मेरा ज़मीर कुछ जाग सा गया था.,
वो मेरे जिस्म पे नहीं कुछ निशान सा मेरे सीने में लगा था।।
अब तू दूर है किसी और की ज़िन्दगी शयाद तेरे आने से फिर खिलती होगी.,
पर मेरा तो पहला प्यार ही कुछ यूं नागवार हुआ की हर आशिक़ को अब मेरी सीख जरूर मिलती होगी।
जहां हैं तू खुश रह मेरी बस यही इल्तज़ा है.,
बेबाक सी में आज भी कुछ आहटो से सहम जाती हूं पर अब अकेले पड़े मेरे दिल की यही सज़ा है।।
It's beautiful ❤️ so proud of you.
ReplyDeleteThank you so much ♥️
DeleteAmazinggggggg
ReplyDeleteThank you so much mam♥️
DeleteAmazing, it says a lot.
ReplyDeleteThank you bhai ♥️
DeleteGood one buddy
ReplyDeleteThank you bhaishaab ♥️♥️
DeleteSuprb line brother 😍
ReplyDeleteThank you brother ♥️
DeleteKhoobsurat ❤️
ReplyDeleteShukriya
DeleteVery well written 🤗
ReplyDeleteThank you so much
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDeleteThank you so much ♥️
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