एक बाप का जीवन

आज पेहली बार तुमनें पापा बोला तो एक जमाना याद आया..,
वो मेरे बचपन का हीरो शायद तुम्हारे साथ फिर लौट आया।
तुम भी ना समझ बैठो एक बाप को गलत बाकियों की तरह..,
इसलिए चलो बताता हूँ तुम्हें एक बाप ने कैसे यहाँ जीवन है बिताया॥

तुम्हारी ख्वाहिशें कुछ ऐसी हो जिन्हें मैं पूरा कर सकूँ..,
तुम्हारी शिकायतें कुछ यूं हो जिन्हें मैं दूर कर सकूँ।
एक बाप हूँ कंधे पे जमाने का डर और बोझ दोनों  लिये फिरता हूँ..,
तुम बस अपने चेहरे पे एक मुस्कान रखो जिसे देख मैं ये बाप होने का कर्ज उतार सकूँ॥

हाँ हो जाता हूँ सख्त तुम्हारी गलतियों पे मैं..,
डरता हूँ मेरा कमजोर होना तुम्हें सही राहों से ना भटका दे।
हाँ रख लेता हूँ मैं प्यार अपने दिल मे अक्सर छुपा कर..,
डरता हूँ मेरा प्यार कहीं तुम्हें कमजोर ना बना दे।
बहा तो लू मैं भी दो-चार आसूँ तुम्हारी चोट पे अक्सर..,
गर डरता हूँ कहीं मेरे आसूँ तुम्हें रूई सा नाजूक ना बना दे॥

भेज खूद से दूर सबको मैं अक्सर तनहाई मे रहता हूँ..,
रोता तो हूँ पर फिर भी अपने आसूँ छुपा लेता हूँ।
ख्वाहिश ये होती है मेरी की अपने बच्चों के नाम से जाना जाउ..,
इसलिए अक्सर उनकी कामयाबियों पे मैं खामोश ही रहता हूँ॥

मैं भी रोता हूँ जब मेरी चिड़िया मेरी डाल से उड़ दूजे डाल पे जा बैठती हैं..,
और रोता मैं तब भी हूँ जब वो मेरा घर छोड़ किसी और का मकान बसाती हैं।
मैं भी रोता हूँ जब मेरी चार दिवारी तोड़ मेरा बेटा अपना एक घर बनाता हैं..,
और मेरी ही बढ़ती उम्र के तले वो अपना चिराग जलाता हैं।
यूं तो आया था मैं भी बरसों पहले यूहीं एक बाप का दिल तोड़ के..,
पर फिर भी रोता हूँ क्योंकि टूटा हैं मेरा एक आशियाने का ख्वाब बहुत जोर से॥

शायद कभी ना समझ पाये ये जहाँ एक बाप के प्यार का फल सफा..,
क्योंकि वो बाप ही तो हैं जिसनें पलटा हैं मेरे गमों को खुशी मे न जाने कितनी दफा॥

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