क्या वो प्यार नहीं था
वो नज़रों का खेल , और बस दो पल का मेल..,
वो तेरी नज़रों की शरारत , और फिर तेरे जाने की आहट..,
वो किनारों पे हमारा साथ चलना और फिर कभी ना रूकने की चाहत।
वो तेरा मुस्कुराना आँखों से और मेरा शरमाना आँखों से..,
वो तेरी बेबाक बातें और उनको सुनती मेरी तन्हा रातें
वो तेरा घमों पे झुठी मुस्कान का हीजाब, देखा था मैंने तुझे करते अपनी दिखावटी मुस्कराहट का हिसाब॥
क्या सच्च में ये वो नहीं था जो मैं सोच रहा था..,
क्या नहीं था ये वो जो मैं कबसे ढूंढ रहा था..,
क्या सच्च में ये "वो" प्यार नहीं था॥
वो सुबह तेरा बिस्तर से उठने का आलस, और तुझे उठाने का मेरा साहस ..,
वो तेरे बिखरे बालों की अंगड़ाइयाँ, और उनमे हर बार घुम होती मेरे परछाइयाँ
वो कोशिशें तेरी मुझे हँसाने की , और साजिशें मेरी तुझे मनाने की।
वो तेरा मेरी नज़रों को पढ़ना, और मेरा तेरे चेहरे को..,
वो तेरा मेरे अन्दर के समन्दर को थामना, और मेरा तेरे अन्दर के सैलाब को..,
वो तेरा कस कर मुझे अपनी बाहों मे भरना, और मेरा चुमना तेरे माथे को॥
क्या सच्च में ये वो नहीं था जो मैं सोच रहा था..,
क्या नहीं था ये वो जो मैं कबसे ढूंढ रहा था..,
क्या सच्च में ये "वो" प्यार नहीं था॥
वो लड़ना तेरा मुझसे उन छोटी बातों मे भी, और मेरा तुझसे हार जाना..,
वो तेरा दूर जाना पास आते ही, और मेरा तुझे फिर से पुकारना..,
वो तकलीफें तेरी कुछ नादान सी, पर फिर भी मेरा परेशान होना..,
वो शरारतें तेरी कुछ बचकानी सी, पर फिर भी मेरा उन पर मुस्कुराना..,
वो हिदायतें तेरी कुछ जानी पहचानी सी, पर फिर भी मेरा उन्हें ना मानना..,
वो रूबरु करना मुझे वापस इन उजालों से पर फिर भी मेरा हाथ ना थामना
क्या सच्च में ये वो नहीं था जो मैं सोच रहा था..,
क्या नहीं था ये वो जो मैं कबसे ढूंढ रहा था..,
क्या सच्च में ये "वो" प्यार नहीं था॥
👌
ReplyDeleteThank you
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ReplyDeleteAmazing. Lovely 👌🏻👌🏻
ReplyDeleteThank you so much 😃😃
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