उस दिन
तू कुछ यूँ ठहर सा गया हैं मुझमे, की अब मेरी खुशबूओ में भी तेरी एक महक सी है..,
तू कुछ इस क़दर छुपा सा है मुझमे , की अब मेरी मुस्कुराहटो में भी तेरी एक छूपी मुस्कान सी है।
अक्सर कुछ तनहा सा रहता हूँ यहाँ तेरे जाने के बाद
पर फिर भी इस पुरे जमाने के बीच मेरी तन्हाई में बसी तेरी एक परछाई सी हैं।।
उस दिन जैसे मैं भीगा ही इसलिये था ताकि तेरी आँखे एक ही पल में मुझे सुखा दे..,
उस दिन उस खिड़की से मैं टकराया ही इसलिये था ताकि तेरे हाथ मुझे थाम सके ..,
उस दिन जैसे मैं हारा ही इसलिये था ताकि तेरी जीत मुझे भी जीता दे।
उस शाम जैसे उस रास्ते पे मैं रुका ही इसलिये था ताकि तू यूंही राहो पे साथ दे..,
उस शाम जैसे मैं रोया ही इसलये था ताकि तू आके फिरसे मुझे हँसा दे..,
उस शाम जैसे मैं चुप ही इसलिये था ताकी मेरी खामोशी ही तुझे कुछ समझा दे।
उस रात मैं जगा ही इसलिये ताकि मेरी नींद से बंद आँखे तुझे हटा ना दे..,
उस रात जैसे तू मुस्कुराई ही इसलिये थी ताकि तेरी हसी मुझे सुकून दे..
और उस रात हम मिले ही थे इसलिये वो खुदा हमे हमेशा के लिये मिला दे।।
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