मैं ये नही कहता
मैं ये नहीं कहता की मैंने खूबसूरती नही देखी..,
पर मैंने अब तक तुम्हारे चेहरे जैसा खुबसूरत कुछ और नहीं देखा।।
मैं ये नहीं कहता की मैंने अपने सारे ख्वाबों को पूरा किया है..,
पर मैंने बेशक अपने सबसे खूबसूरत ख्वाब को तेरे साथ हर रोज जीया है।।
कैसे इकरार करूँ अपनी चाहतो का तुझसे.., क्यूंकि
मैं ये तो नही कहता की मुझे तुमसे प्यार है..,
पर अक्सर तुम्हारे ना होने पे मैंने तुम्हे याद किया हैं।।
ये तुम्हारे हाथ जब-जब तुम्हारे बालो को सम्भालते है..,
मेरी ख्वाहिशे तब-तब बेसहारा हो जाती हैं।
यूँ तुम जब-जब अपनी मुसकुराहट को हदों में समेट ती हो..,
मेरी हदे तब-तब बेहद हो जाती हैं।
और जब-जब मेरी नज़रे छुपकर तुम्हारी नज़रों से मिलती हैं..,
मेरी चहाते बेपर्दा हो जाती हैं।।
रह जाता हूँ मैं तेरे लबो पे कुछ यूँ..,
जिस क़दर ऒश की बूंदे अक्सर पत्तो पे रह जाती है।
और रह जाना मेरे लबो पे तू कुछ यूँ..,
जैसे पानी की बूंदे अक्सर समन्दरो में समां जाती हैं।।
आ समेट लूँ मैं तुझे खुद मे कुछ यूँ.,
जैसे समटे हुए है व्क़्त ज़िन्दगी को अपनी बाहों में।
आ ढूंढ लू खुद को मैं तुझमे कुछ यूँ.,
जैसे ढूंढता है मोती हंस एक सागर में।
क्या ज़िक्र करूँ अपनी चाहतो का तुझसे मैं..,
बस आजा और लेले मुझे अपनी बाहों में कुछ यूँ..,
जैसे तुम्हारे साये ने तुम्हे अपनी बाहों में जकड़ रखा है।।
Comments
Post a Comment