मेरे पापा

वो हाथ जो धुप में छाव की तरह सर पे था..,
वही हाथ हर परेशानी में सहारे की तरह साथ में था.,,
कैसे शुक्रिया अता करूँ आपके हर एक एहसान का मेरे पापा..,
आपका हाथ तो सर पे छत की तरह आशीर्वाद सा था।।

वो आपकी आँखों में समाया गुस्सा
आज भी डराता है मुझे..,
वो आपका मुझे छोड़ हमेशा के लिए चले जाने का ख्वाब
आज भी नींद से जगा देता है मुझे।।
बयाँ नही कर सकता आपके साथ बिताये हर एक पल की खुशी मैं..,
वो आपका छुप-छुप कर मुझे रुलाने का किस्सा
आज भी हँसता है मुझे।।

यहाँ मेरी हर एक कामयाबी पे नाम आपका होगा..,
क्यूंकि मुझे हर रोज कदम बढाना सीखाया है आपने।
यहाँ मेरी हर एक हार पर मेरे साथ आपकी सीख होगी..,
क्यूंकि मुझे कभी ना हार मानने का हुनर सीखाया है आपने।
समां जाता है मेरा पूरा ही जहां सिर्फ एक शब्द में "पापा"...,
इसलिए तो देखता हु ये सारा जहां सिर्फ आप ही की आखों से..,
क्यूंकि मुझे ये पूरा जहां देखने का नजरिया दिया है आपने।।

मेरे आने की ख़ुशी में तुम सबसे ज्यदा खुश थे पापा..,
और आज मुझे विदा करते हुए भी तुम ही सबसे ज्यदा खुश हो..,
कभी समझ ही नही पायेगा ये जहाँ एक बाप के प्यार की हदे...,
क्यूंकि मेरी हर एक चोट पे डाटते भी तुम्ही हो और सहलाते भी तुम ही हो।।

आज कर तो रहे हो विदा घर से पर कभी दिल सा ना करना..,
छोड़ के जा रही हूँ ये सारी यादें यहाँ पापा इन्हें सनजॊये रखना।
इसी आँगन में तुम्हारे कंधो पे बैठ ये जहां देखा था मेने.,,
इस जहाँ को भूल कभी इस बेटी का भी ख्याल करना।।

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